शिक्षा प्रौद्योगिकी – Education Technology

शिक्षा में प्रौद्योगिकी तथा शिक्षा की प्रौद्योगिकी शिक्षा में दृश्य-श्रव्य सामग्री जैसे श्यामपट्ट, ओवरहेड प्रोजेक्टर, दूरदर्शन तथा कम्प्यूटर का उपयोग शिक्षा में प्रौद्योगिकी का द्योतक है। यहां पर सन्देश वाहन के लिए प्रयुक्त माध्यमों को अधिक महत्व दिया जाता है, जबकि शैक्षिक प्रौद्योगिकी के अन्य उपागमों को शिक्षा की प्रौद्योगिकी कहा जाता है। इस उपागम की विशेषताएं हैं अध्येता की आवश्यकताओं के अनुसार विधि, अधिगम के उद्देश्य, शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया तथा संसाधनों की उपलब्धता। शिक्षा की प्रौद्योगिकी में शिक्षा में | प्रौद्योगिकी सम्मिलित है। इसे दिए गए रेखाचित्र द्वारा दर्शाया जा सकता

शिक्षा की प्रौद्योगिकी (Education Technology)

शिक्षा की प्रौद्योगिकी का संबंध अधिगम प्रक्रिया के वैज्ञानिक ज्ञान- संसाधनों के समस्त सक्रिय और व्यवस्थित अनुप्रयोगों से है। शैक्षिक प्रक्रिया की क्रमबद्ध योजना बनाना, अभिकल्पन, उत्पादन, प्रबंधन और मूल्यांकन में माध्यम का चयनात्मक उपयोग, कार्मिक, ज्ञान, विचार और संसाधन भी शिक्षा की प्रौद्योगिकी में सम्मिलित है। ज्ञान की प्राप्ति और उसके उपयोग के लिए प्रत्येक विद्यार्थी को उस प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। इसमें प्राप्तव्य शैक्षिक उद्देश्यों के संबंध में निर्णय लेना भी समाहित है। इसके साथ-साथ इसमें शैक्षिक समूह के आकार, शैक्षिक अनुक्रम, शिक्षण विधि तथा संचार साधन का चुनाव भी समाविष्ट है।

शिक्षा में प्रौद्योगिकी (Technology in Education)

शिक्षा में प्रौद्योगिकी से तात्पर्य शिक्षा में प्रौद्योगिकी और यंत्रसामग्री के उपयोग से है। इसका मुख्य संबंध बिजली के या उन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से है, जिनका शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए उपयोग होता है।

सैटलर (1978) के अनुसार शिक्षा की प्रौद्योगिकी तो व्यवहारपरक विज्ञान संकल्पना है, जबकि शिक्षा में प्रौद्योगिकी, शैक्षिक प्रौद्योगिकी की यंत्र (साधन) परक संकल्पना है। उन्होंने  शिक्षा की प्रौद्योगिकी और शिक्षा में प्रौद्योगिकी के बीच अंतर स्पष्ट किया है। रेडियो, टीवी, शिरोपरि प्रक्षेपित्र (ओ.एच.पी.) कंप्यूटर, टेप रिकार्डर आदि शिक्षा में प्रौद्योगिकी के उदाहरण हैं, जबकि रेडियो कार्यक्रम, दूरदर्शन कार्यक्रम, कंप्यूटर प्रोग्राम, जो शिक्षा की वैज्ञानिक जानकारी पर आधारित है, शिक्षा की प्रौद्योगिकी के उदाहरण हैं।

 

अध्यापन-अधिगम साधनों का वर्गीकरण (Classification of Teaching-Learning Tools)

अध्यापन-अधिगम साधनों का अनेक प्रकार से वर्गीकरण कर सकते हैं। ऐडगर डेल का “अनुभव का शंकु” हमें उनके वर्गीकरण संबंधी एक संभावना प्रदान करता है।सबसे अधिक प्रचलित पारंपरिक वर्गीकरण अध्यापन-अधिगम साधनों के माध्यम से उद्दीप्त ज्ञानेंद्रियों के आधार पर किया गया है।

I. चाक्षुष (शाब्दिक) मुद्रित या प्रतिलिपित

  • पाठ्यपुस्तक, अनुपूरक पुस्तक
  • संदर्भ ग्रंथ, विश्वकोश आदि
  • पत्रिका, समाचारपत्र आदि
  • अभिलेख और कतरने
  • प्रतिलिपित लिखित सामग्री
  • अभिक्रमित लिखित सामग्री
  • अभिक्रमित अधिगम सामग्री और स्व-शिक्षण मॉड्यूल
  • केस अध्ययन (वास्तविक का अनुरूपण) और केस रिपोर्ट

 ॥. चाक्षुष (चित्रात्मक) अप्रक्षेपित द्विआयामी

  • श्यामपट्ट लेखन और आरेखन
  • चार्ट
  • पोस्टर
  • मानचित्र
  • आरेख
  • लेखाचित्र (ग्राफ)
  • छायाचित्र (फोटोग्राफ)
  • व्यंगचित्र (कार्टून)
  • कौतुक-कथा पट्टी (कॉमिक स्ट्रिप)

III. श्रव्य (कर्णज)

  • मानव वाणी
  • ग्रामोफोन रिकार्ड
  • श्रव्य टेप/डिस्क
  • त्रियामी ध्वनि रिकार्ड (स्टीरियो रिकार्ड)
  • रेडियो प्रसारण
  • दूरभाष (टेलीफोन) पर वार्तालाप

IV. दृश्य (चाक्षुष) अप्रक्षेपित त्रिआयामी

  • प्रतिमान (माडल)
  • प्रायोगिक प्रतिदर्श (मॉक-अप)
  • त्रिविम प्रदर्श ग्लोब
  • उच्चावच मानचित्र
  • नमूना/प्रतिदर्श
  • कठपुतली
  • त्रिआयामी चित्र (होलोग्राम)

V. दृश्य (चाक्षुष) प्रक्षेपित स्थिर

  • स्लाइड
  • फिल्म स्ट्रिप
  • ट्रांसपेरेंसी/पारदर्शिका (शिरोपरि प्रोजेक्टर)
  • सूक्ष्म फिल्म (माइक्रोफिल्म), माइक्रोकार्ड
  • कम्प्यूटर

VI. श्रव्य-दृश्य प्रक्षेपित (गतिसहित)

  • चलचित्र फिल्म
  • टेलीविजन
  • निकट परिपथ टीवी
  • श्रव्य कैसेट/डिस्क
  • बहु माध्यम कम्प्यूटर
  • सपी-टेप (स्लाइड-टेप) प्रस्तुति

शैक्षणिक प्रक्रिया सामग्री

कैंप और स्मैली (1989) के अनुसार, शैक्षणिक प्रक्रिया सामग्री के सफल होने के लिए निम्नलिखित घटित होना चाहिए:

संतोषजनक अधिगम घटित होता है ताकि अध्येता आवश्यक ज्ञान,कौशलों और अभिवृत्ति व्यवहार प्रारूप का उपार्जन कर सकें। अधिगम धन, समय और ऊर्जा के उचित व्यय के अनुसार होता है। अधिगम अनुभव सार्थक ओर रोचक होते हैं, ताकि अध्येताओं को अपना अध्ययन जारी रखने को प्रोत्साहन मिले। प्रक्रिया सामग्री के डिजाइनकर्ता के लिए शैक्षणिक प्रक्रिया सामग्री की आयोजना और क्रियान्वयन, संतोषजनक अनुभव साबित हो सकते हैं।

प्रक्रिया सामग्री के डिजाइन करने का प्रक्रम निम्नलिखित चार प्रश्नों के उत्तरों से शुरू होता है।

  1. प्रक्रिया सामग्री के उपयोक्ता कौन हैं? (अध्येता)
  2. अध्येता क्या सीखें या क्या कर सकें इस बारे में हम क्या चाहते हैं? (उद्देश्य)
  3. विषयवस्तु या कौशल सबसे अच्छी तरह से किस प्रकार सीखा जा सकता है? (अध्यापन/अधिगम विधियां, माध्यम और क्रियाकलाप तथा संसाधन)
  4. अधिगम किस हद तक उपार्जित हुआ है यह हम किस प्रकार निर्धारित करते हैं? (आकलन तथा प्रतिपुष्टि)

ये प्रश्न चार मुख्य तत्वों पर बल देते हैं- 1.अर्थात, 2.उद्देश्य, 3.विधियां और 4.आकलन।

गुंटर, ऐस्टीस और श्वाब (1990) के अनुसार, उपरोक्त चार तत्त्वों से प्रक्रिया सामग्री विकास कार्यविधियों का ढांचा तैयार होता है। अन्य कारक भी हैं जो या तो इन तत्त्वों का समर्थन करते हैं या इनसे संबंधित हैं, जैसे कि अधिगम आवश्यकताओं का आकलन, प्रकरणों का चयन, अध्येताओं के अभिलक्षणों का परीक्षण, विधियों और माध्यमों का वितरण, सहायता सेवाओं की विशिष्ट और अधिगम परिणामों का मूल्यांकन, इन सभी घटकों को एक साथ लेते हुए, हम अपने अध्येताओं के लिए शैक्षणिक प्रक्रिया सामग्री योजना का विकास कर सकते हैं।

शिक्षा और प्रशिक्षण में, माध्यमों की भूमिका पर अपनी चर्चा के दौरान, लोकांटिस और एटकिंसन (1984) ने ज्ञान, अभिवृत्तियों, और कौशलों के उपार्जन के लिए शिक्षण की अभिकल्पना करने के कुछ सिद्धान्तों का सुझाव दिया था। वे सिद्धान्त संक्षेप में नीचे दिए गए हैं:

  • ज्ञान अर्जन के लिए प्रक्रिया सामग्री की अभिकल्पना करने के सिद्धान्त

शिक्षण के शुरू में अनूठी और अप्रत्याशित घटनाएँ शामिल कीजिए। पूर्वापेक्षित सूचना को पुन:स्मरण कीजिए। केवल संबंधित जानकारी ही प्रस्तुत कीजिए ताकि अध्येताओं को उद्देश्यों की प्राप्ति में मदद मिले। आसानी से समझ में आने वाली विषयवस्तु का आयोजन कीजिए। अध्येताओं के ध्यान को दिशा देने के लिए अनुबोधन और संकेत प्रदान कीजिए; अंतर्निहित या अध्यारोपित शब्दों पर प्रकाश डालिए; चाक्षुष (दृश्य) या आलेखिकी अध्येता के ध्यान को अधिगम बिंदुओं की ओर ले जा सकते हैं।

प्रस्तुत की जाने वाली जानकारी में परिवर्तन करते रहिए और समुचित समय विस्तृति का इस्तेमाल कीजिए, यदि एक ही जानकारी को लंबे अरसे तक प्रस्तुत किया या दर्शाया जाता रहे तो ध्यान हट सकता है। अपने दृष्टिकोण को स्पष्ट करने के लिए, उदाहरणों और दृष्टान्तों को प्रस्तुत कीजिए। > अधिगम के धारण के लिए समुचित अभ्यास प्रदान कीजिए। तुरंत प्रतिपुष्टि/परिणामों का ज्ञान प्रदान कीजिए। » सीखे हुए की समीक्षा कीजिए और दोहराइए।

  • अभिवृत्तियों और व्यवहार के लिए प्रक्रिया सामग्री की अभिकल्पना करने के सिद्धांत

अध्येता को बताइए कि आप जो प्रकरण (विषयवस्तु) पढ़ रहे है वह आपके लिए महत्त्वपूर्ण और उपयोगी है। उसके लिए प्रकरण महत्त्वपूर्ण क्यों है, इसके कारण या विश्वासप्रद स्पष्टीकरण प्रस्तुत कीजिए। अंतर्जात और बहिर्जात पारितोषिक/प्रबलन की व्यवस्था कीजिए। सुनिश्चित कीजिए कि विद्यार्थी सफलता और उपलब्धि का अनुभव करें। अध्येताओं को दिए गए कार्यों/कार्यकलापों को सफलतापूर्वक पूरा करना चाहिए। विषयवस्तु का संबंध अध्येताओं के लिए आकर्षक चीजों के साथ जोडिए।

  • मनश्चालक कौशलों के लिए प्रक्रिया सामग्री की अभिकल्पना करने के सिद्धान्

कौशलों के अभिलक्षणों को पहचानिए प्रत्येक मन: चालित कौशल के लिए, अलग अधिगम दशाओं और कौशल के प्रदर्शन और अभ्यास के तरीकों की आवश्यकता होती है। परन्तु ज्यादातर कौशलों के एक से ज्यादा अभिलक्षण होते हैं। इसलिए उनके लिए अधिगम हेतु दशाओं के एक संयोजन के तैयार करने और उनको प्रदान करने की आवश्यकता होती है। कौशल का प्रदर्शन कीजिए और उसको समझाइए। विशिष्ट कौशल के प्रदर्शन के लिए विविध तकनीकों और माध्यमों का इस्तेमाल किया जा सकता है। सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में मंदगति चित्र, कम्प्यूटर खेलकरण आदि की तरह के विकास, कौशलों को ज्यादा प्रभावी ढंग से प्रदर्शित करने को संभव बना देते हैं। कौशल के निष्पादन पर अभ्यास और प्रतिपुष्टि प्रदान कीजिए। अभ्यास के पर्याप्त अवसर, कौशल में प्रवीणता प्राप्ति को सुनिश्चित करेंगे। अनुरूपण और वास्तविक अभ्यास दोनों ही अधिगम के दीर्घकालीन प्रभाव को सुनिश्चित करते हैं।

हार्बेक और शर्मन (1999) ने छोटे बच्चों के लिए विकासात्मक उपयुक्त वेबसाइटों की अभिकल्पना करने के सात मोटे सिद्धांत बताए थे। कुछ संशोधनों के साथ, इन सिद्धान्तों को किसी भी शैक्षिक प्रक्रिया सामग्री की अभिकल्पना करने के लिए प्रभावी ढंग से इस्तेमाल किया जा सकता है।

  • सरल, स्पष्ट और मूर्त डिजाइन : कहने की आवश्यकता नहीं है कि प्रक्रिया सामग्री का डिजाइन मूर्त होना चाहिए। इसके द्वारा अध्येताओं को सरल, और स्पष्ट मूर्त उत्तेजनों, उदाहरणों और दृष्टांतों को प्रदान किया जाना चाहिए। ऐसा शिक्षार्थियों की मानसिक आयु और शारीरिक विकास को ध्यान में रखते हुए किया जाना चाहिए।
  • अधिगम निर्देशन : इष्टतम अधिगम को सुनिश्चित करने के लिए, अध्येताओं के निर्देशन की कोई व्यवस्था होनी चाहिए। किसी समस्या के मामले में, उनको कोई बाह्य-अतिरिक्त समर्थन प्रदान किया जाना चाहिए। प्रक्रिया सामग्री में अध्येताओं के अधिगम को सुगम बनाने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन परामर्शन या अनुशिक्षण की व्यवस्था होनी चाहिए।
  • प्रगामी और व्यक्तिकृत : प्रक्रिया सामग्री का डिजाइनअध्येताओं की पूर्वापेक्षाओं पर आधारित होना चाहिए और उनको कदम-दर-कदम अंत्य व्यवहार तक ले जाना चाहिए। प्रक्रिया सामग्री की अभिकल्पना करते समय, अध्येताओं की आयु, योग्यता, रुचि और अभिलक्षणों को ध्यान में रखना चाहिए। ऐसा करके हम उनके व्यक्तिगत भेदों की आवश्यकताओं की पूर्ति करते हैं।
  • लक्ष्य समूह के लिए प्रासंगिक : प्रक्रिया सामग्री के डिजाइन के द्वारा अध्येताओं की शैक्षिक और प्रशिक्षण आवश्यकताओं की पूर्ति होनी चाहिए। आवश्यकता पर आधारित निविष्ट प्रक्रिया सामग्री को उपयोगी और रोचक बनाएगा विषयवस्तु की पहचान संकल्पना मानचित्रण के आधार पर की जानी चाहिए।
  • एकीकृत क्रियाकलाप : प्रक्रिया सामग्री के डिजाइन में एक ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए कि जिसके द्वारा – अध्येता शिक्षाशास्त्रीय क्रियाकलापों पर वस्तुतः कार्य करने के लिए अभिप्रेरित हो जाए। उनको समस्या समाधान, खोज अधिगम आदि जैसे क्रियाकलापों में शामिल किया जाना चाहिए। एकीकृत क्रियाकलापों का संबंध अध्येताओं के शारीरिक संवेगात्मक और सामाजिक विकास से जोड़ा जाना चाहिए।
  • सक्रिय और सुखद : सक्रिय अनुक्रिया करना अधिगम के किसी भी प्रकार की एक बुनियादी शर्त होती है। इसलिए, प्रक्रिया सामग्री की अभिकल्पना इस ढंग से की जानी चाहिए कि अध्येता अधिगम प्रक्रम में शारीरिक रूप से और संज्ञानात्मक रूप से अपने आपको संलग्न कर लें। विभिन्न प्रकारों और स्तरों के रोचक क्रियाकलाप मूल्यवान और स्थायी अनुभव प्रदान कर सकते हैं। इससे प्रक्रिया सामग्री आनंददायक बन जाएगी। अध्येताओं के अभिप्रेरण और ध्यान को आकर्षित करना, पकड़े रखना और बनाए रखना एक प्रभावी प्रक्रिया सामग्री डिजाइन का मुख्य अभिलक्षण होता है।
  • अनेक विकल्पों सहित अन्वेषणात्मक : किसी भी प्रक्रिया सामग्री के दो पक्ष होते हैं—प्रथम अध्येताओं को समस्याओं के सबसे ज्यादा उपयुक्त हलों को खोजने देना चाहिए। एक ऐसे शाखायन आरूप का अनुसरण करने के प्रयास किए जाने चाहिए, जिसमें अध्येताओं को अधिगम के कठोर रैखिक उपागम का अनुसरण करने के लिए मजबूर न होना पड़े। प्रक्रिया सामग्री को विद्यार्थियों के समक्ष स्पष्ट होना चाहिए। दूसरे प्रक्रिया सामग्री को ऐसा होना चाहिए कि वह अध्येताओं को अधिगम का नियंत्रण प्रदान कर दे। डिजाइन में अध्येताओं को अपने अधिगम के बारे में उपयुक्त निर्णय लेने की गुजाइश होनी चाहिए। इसलिए प्रक्रिया सामग्री मुक्त होनी चाहिए ताकि अध्येताओं अधिगम का अपना स्वयं का रास्ता अपना सकें।

 प्रक्रिया सामग्री का डिजाइन समय, हमें बढ़िया अध्यापन रीतियों को ध्यान में रखना चाहिए। कुछ रीतियां नीचे दी जा रही है:

  • उद्देश्य का स्पष्टतया कथन करना।
  • प्रत्येक अध्येता के प्रति आदर और सरोकार दर्शाना।
  • विषयवस्तु को रोचक और उत्तेजक बनाना।
  • उपयुक्त भाषा और शब्दों का इस्तेमाल करना
  • सीखी जा रही संकल्पनाओं के बहु परिप्रेक्ष्य प्रदान करना।
  • अध्येता के अनुभवों को इस्तेमाल करना।
  • अध्येता को समस्या समाधान में लगाना
  • उद्दीपनकारी (Stimulating) विविधताओं को प्रदान करने के लिए श्रव्य और दृश्य सामग्रियों का इस्तेमाल करना।
  • कार्य/विषयवस्तु को उपयुक्त भार देना।
  • उपयुक्त आकलन विधियों को लागू करना, जिसके प्रयोजन को अध्येता साफ-साफ समझ सकें। उनके कार्य या अधिगम पर प्रतिपुष्टि देना।
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